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" देवांगन" मेरे मन का गुलशन है जहां मेंने मेरे जीवन के तमाम मुरझाए, महकते सुमन यहाँ संजो कर रक्खे हैं. इन्हीं की बदौलत आज मैं अपने धड़कनों में एक ख़ूशबू टहलती हुई पाती हूं, जिसके साथ सफ़र करते -करते मैं आज यहाँ पर हूँ, इसी गुलशन से मेरी सांसें महक रही है.
देवी नागरानी
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